संदेश

प्रथम खंड(भूमिका)

                                              वैज्ञानिक अनुसंधान और जवाबदेही    विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग  पर आश्रित व्यवस्थित विद्या ही विज्ञान है| किसी विषय के स्वभाव या सिद्धान्तों को समझने के लिये किये जाने वाली प्रक्रिया ही उस विषय से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान है। विज्ञान तथ्य, सिद्धान्त और तरीकों को प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित और व्यवस्थित करती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि प्रकृति के क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित ज्ञान को विज्ञान कहते हैं ।प्रकृति में उपस्थित वस्तुओं के क्रमबध्द अध्ययन से ज्ञान प्राप्त करने को ही विज्ञान कहते हैं या किसी भी वस्तु के बारे में विस्तृत ज्ञान को ही विज्ञान कहते हैंं।      इस दृष्टि से अनुसंधान प्रकृति से लेकर जीवन तक प्रत्येक क्षेत्र में हमेंशा चला करते हैं इसीलिए प्रत्येक क्षेत्र मे...

दो शब्द

         सर्दी गर्मी और हवा या कफ पित्त वात के संतुलित संचार पर ही संपूर्ण प्रकृति और जीवन आश्रित है जीवन प्रकृति के अधीन है इसलिए मनुष्य जीवन का भी प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित होना स्वाभाविक ही है | बाह्य और आंतरिक दोनों प्रकार से सर्दी गर्मी और हवा के संतुलित संचार से ही मनुष्य शरीर स्वस्थ रह पाते हैं | बाह्य  से अभिप्राय उस प्राकृतिक वातावरण से है शरीर के बाहर का वह प्राकृतिक वातावरण जिसमें हम साँस लेते और छोड़ते हैं और आंतरिक से अभिप्राय शरीर के अंदर जहाँ तक हमारा स्वाँस बिना किसी रुकावट के आसानी से जाता और आता रहता है |        शरीर के बाहर का प्राकृतिक वातावरण बिगड़ने का प्रभाव बहुत लोगों पर एक जैसा पड़ने से बहुत लोग एक  जैसे रोगों से पीड़ित होने लगते हैं यदि यह बिगाड़ बहुत बड़े पैमाने पर होता है तो एक जैसे बड़े रोगों से बहुत बड़ी संख्या में लोग पीड़ित होते देखे जाते हैं यह महामारियों के समय ही होता है |इसके अतिरिक्त शरीर के अंदर का आतंरिक वातावरण बिगड़ने से केवल वही व्यक्ति रोगी होता है जिसके अपने...